दंतेवाड़ा में नक्सलियों की मौजूदगी के आधार पर हो रहा गांवों का वर्गीकरण

रायपुरः छत्तीसगढ़ की दंतेवाड़ा पुलिस जिले के गांवों में माओवादियों की उपस्थिति की प्रकृति और स्तर का पता लगाने के लिए एक सर्वेक्षण शुरू किया है. पहला‘पंचायतवार नक्सल संवेदनशील सर्वे’ इस साल जनवरी में शुरू किया गया था और अब इसे दोबारा जुलाई में शुरू किया गया है. दंतेवाड़ा पुलिस की योजना है कि जिले की सभी 149 ग्राम पंचायतों को हर साल दो बार होने वाले इस सर्वे में शामिल किया जाए. रिपोर्ट के मुताबिक, इस सर्वे में शामिल कुछ सवाल इस प्रकार हैं, ‘क्या हथियारबंद नक्सलियों की आपके गांवों में बैठकें होती हैं?. क्या हथियारबंद नक्सल आपके गांव में रुकते हैं? क्या गांव में बिजली, पानी, सड़क और स्कूल जैसी बुनियादी सुविधाएं हैं?’

इसके अलावा भी कई सवाल हैं, ‘जैसे- क्या बीते एक साल में आपके इलाके में कोई नक्सली घटना हुई और क्या ग्राम पंचायत के प्रतिनिधि गांव में रहते हैं?’ यह सर्वे दंतेवाड़ा के पुलिस अधीक्षक अभिषेक पल्लव की पहल पर हो रहा है और इसके तहत इकट्ठा किए गए आंकड़ों के आधार पर ग्राम पंचायतों को हरे (Green), पीले (Yellow) और लाल (Red) क्षेत्र में वर्गीकृत किया जा सकता है.

हरे क्षेत्र से मतलब नक्सल मुक्त क्षेत्र होगा, पीले क्षेत्र से नक्सल संवेदनशील क्षेत्र जबकि लाल क्षेत्र से नक्सल अतिसंवेदनशील क्षेत्र से होगा. पल्लव ने कहा, ‘हमारा दावा है कि गांवों में नक्सलियों का दबदबा घट रहा है, लेकिन इसका समर्थन करने के लिए हमारे पास कोई आंकड़ा नहीं है. हम इलाके को समझने के लिए हर छह महीने में यह सर्वे कराने की कोशिश कर रहे हैं.’

इस सर्वे में ग्रामीणों के अलावा गांवों के सरपंच, शिक्षक, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और अन्य सरकारी अधिकारियों को ‘हां’ या ‘नहीं’ में जवाब देना होगा.पल्लव ने कहा, ‘अगर नक्सलियों से संबंधित सभी सवालों के जवाब ‘नहीं’ में मिलते हैं तो उस गांव को हरे ग्राम के तौर पर घोषित किया जाएगा. अगर एक भी सवाल का जवाब ‘हां’ होगा तो गांव को पीले क्षेत्र में चिह्नित किया जाएगा.’

उन्होंने आगे कहा, ‘लाल गांव के तौर पर चिह्नित होने के लिए ग्रामीणों और सरकारी अधिकारियों को सर्वे में पूछे गए सवाल 1, 4 और 5 का जवाब जरूर देना होगा, जिनमें पूछा गया है कि क्या बीते एक साल में आपके गांव में कोई नक्सली घटना हुई है और क्या हथियारबंद नक्सली आपके गांव आए हैं या रुके हैं? इन सवालों का जवाब ‘हां’ मिलने पर उस गांव को लाल गांव के तौर पर चिह्नित किया जाएगा.’

उन्होंने कहा, ‘हरे क्षेत्रों में हमें सर्वेक्षण के लिए लगभग 15-20 लोग मिलते हैं. जिन गांवों में कुछ ही लोग सर्वे में शामिल होना चाहते हैं और जिन्हें हम पहले से ही जानते हैं कि वे माओवादी उपस्थिति वाले क्षेत्रों में हैं तो स्वत: ही उस गांव को लाल गांव के तौर पर चिह्नित कर देंगे.’

दंतेवाड़ा पुलिस के मुताबिक, जनवरी में हुए सर्वे के बाद से ही स्थिति सुधरी है. पुलिस ने उस समय 33 गांवों को लाल, 42 को पीले और 74 को हरे गांवों के तौर पर चिह्नित किया था. जुलाई तक यह संख्या बदल गई और 26 गांव लाल, 34 गांव पीले और 89 गांव हरे के तौर पर चिह्नित हुए. इसमें 15 नए हरे गांव गामावाड़ा और आठ अन्य गांव दंतेवाड़ा ब्लॉक के हैं. गीदम ब्लॉक के दो गांव और जिले के कुआकोंडा ब्लॉक का एक गांव शामिल है.

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