मध्य प्रदेश: कोरोना टीकाकरण के लिए अनोखे उपाय अपनाए जा रहे, शराबियों को 10 फीसदी दे रहे छूट

मध्य प्रदेश में कोरोना टीकाकरण के लिए प्रशासनिक स्तर पर कई तरह के उपाय अपनाए जा रहे हैं, जिनमें कुछ अनोखे आदेश भी होने लगे हैं। आबकारी अधिकारियों के हाल ही के खंडवा और मंदसौर में आबकारी अफसरों द्वारा अपनाए गए उपायों से सरकार पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। मंदसौर में टीका सर्टिफिकेट दिखाए जाने पर शराबकी खरीद में छूट देने के आदेश पर भाजपा के अपने ही विधायक यशपाल सिंह ने विरोध जता दिया है।

मध्य प्रदेश में आधी आबादी को कोरोना के दो डोज लग चुके हैं लेकिन अभी भी लोगों में जागरूकता की कमी है। प्रशासन छूट गए लोगों के पास पहुंचने के लिए कई तरह के प्रयास कर रहा है।

बुधवार को प्रदेश में महाभियान चलाया जा रहा है लेकिन इस अभियान को स‌फल बनाने की कोशिश में मंदसौर के जिला आबकारी अधिकारी के आदेश से विवादास्पद स्थिति बन गई है। जिला आबकारी अधिकारी ने महाभियान के लिए शराब पर दस फीसदी की छूट का अनोखा आदेश जारी कर दिया है। इसमें उन्होंने कहा है कि जो भी कोरोना टीका का दोनों डोज लगने का सर्टिफिकेट दिखाएगा तो उसे शराब की कीमत में दस फीसदी की छूट दी जाएगी।

मंदसौर जिले के भाजपा के वरिष्ठ विधायक यशपाल सिसौदिया ने इसका विरोध कर दिया है। उन्होंने ट्वीट कर कहा है कि इस तरह के आदेश से शराब पीने वालों को प्रोत्साहन मिलेगा। इस तरह का कोई नवाचार है तो यह उचित नहीं है। ऐसा कोई मध्य प्रदेश सरकार का कोई निर्णय भी नहीं है।

उनके एक प्रशंसक ने चुनाव के वक्त उनके शराब नहीं बांटने के वादे का एक पंपलेट भी शेयर किया है और विधायक को उनके वादे की याद दिलाई है।

प्रदेश कांग्रेस के मीडिया विभाग के उपाध्यक्ष भूपेंद्र गुप्ता ने मंदसौर के आबकारी अधिकारी के आदेश पर आपत्ति की है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार की शराब को लेकर दोमुंही नीति सामने आती है।

 

एक तरफ वह शराब बंदी की बातें करती है और दूसरी तरफ कोरोना टीके के प्रमाण दिखाने वालों को शराब लेने पर छूट देती है। वहीं, शराब पीने वालों के झूठ नहीं बोलने के बयान दिए जाते हैं।

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